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भारत की सीमाओं की पवित्रता को भंग नहीं होने देंगे, चाहे कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े: राजनाथ

 

भारत की सीमाओं की पवित्रता को भंग नहीं होने देंगे, चाहे कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े: राजनाथ


पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारत मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। 


रक्षामंत्री ने कहा कि हम भारत की सीमाओं की पवित्रता को भंग नहीं होने देंगे। चाहे हमें कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। उन्होंने आगे कहा, तीन नवंबर से बंगाल की खाड़ी में 'मालाबार अभ्यास' चल रहा है, जिसमें भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भाग ले रहे हैं। यह अभ्यास भारत-प्रशांत क्षेत्र के सभी देशों को सुरक्षित महसूस कराता है। 
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि 1965 और 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच दो युद्ध हुए, जिसमें पाकिस्तान की हार हुई। इन युद्धों में हार उन लोगों के लिए साबित हुई, जिन्होंने पाकिस्तान को यह बताया कि वे भारत के साथ पूर्ण युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है। 

उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होना चाहिए और सीमा पर शांति और नियमों को कायम रखने के लिए हुए विभिन्न समझौतों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत सीमा पर दूसरी चुनौती का सामना कर रहा है। भारत शांतिपूर्ण देश है। हम मतभेदों को विवाद नहीं बनने देने में विश्वास करते हैं। हम विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने को महत्व देते हैं।

रक्षामंत्री ने कहा, 'आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को छोड़कर, भारत ने अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सुधारा है। हमने आपसी सम्मान और आपसी हित के आधार पर संबंधों को बढा़ने के लिए अपने मित्रों की मदद और समर्थन के लिए भारी निवेश किया है।'

उन्होंने कहा कि पहला सिद्धांत, बाहरी और आंतरिक खतरे से भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता, दूसरा, सुरक्षित और स्थिर माहौल ताकि भारत का आर्थिक विकास हो सके। तीसरी सीमा के परे हमारे लोगों और रक्ष हितों की सुरक्षा हो सके और चौथी वैश्विक और एक दूसरे से जुड़े विश्व में भरोसा।


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