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अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मचारियों को आईटीबीपी कैंटीन में नहीं मिलेगी शराब

 

अर्धसैनिक बलों के पूर्व कर्मचारियों को आईटीबीपी कैंटीन में नहीं मिलेगी शराब




सार


एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, आईटीबीपी ने अब अपनी सभी कैंटीन को ये आदेश जारी किए हैं कि वहां पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल के किसी भी सेवानिवृत्त व्यक्ति को शराब न दी जाए...

विस्तार

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भेजे शिकायती पत्र में कहा है कि आईटीबीपी ने अपनी कैंटीन में अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को मिलने वाली शराब पर रोक लगा दी है। इससे बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और सीआईएसएफ के पूर्व कर्मचारियों में गुस्सा है। अभी तक चली आ रही व्यवस्था में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी बल की कैंटीन से शराब ले सकते हैं।

एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, आईटीबीपी ने अब अपनी सभी कैंटीन को ये आदेश जारी किए हैं कि वहां पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल के किसी भी सेवानिवृत्त व्यक्ति को शराब न दी जाए। दूसरे बलों के पूर्व कर्मियों को वेलफेयर एंड रिहेबिलिटेशन बोर्ड 'वार्ब' के माध्यम से शराब जारी करने का आग्रह पत्र लेना होगा। दूसरा, विकल्प ये है कि रिटायर्ड कर्मी जिस बल से सेवानिवृत हुए हैं, वहां पर आईटीबीपी कैंटीन की सुविधा लेने के लिए आग्रह किया जाए। हालांकि आईटीबीपी कर्मी इस दायरे से बाहर रखे गए हैं।

एसोसिएशन के मुताबिक, आईटीबीपी ने 24 सितम्बर 2020 को एक नई एसओपी (स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाई थी। इसके तहत जारी हुए आदेश में लिखा था कि हिमवीरों को छोड़कर अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को कैंटीन से मिलने वाली शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके चलते देशभर के सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ व एसएसबी के पूर्व अर्धसैनिक परिवारों में भारी रोष है।

रणबीर सिंह ने इस फैसले को नादिरशाह का फरमान करार दिया है। उन्होंने आईटीबीपी से पूछा है कि क्या ऐसा आदेश निकालने से पहले अन्य सुरक्षा बलों के महानिदेशकों व वार्ब चेयरमैन के साथ विचार विमर्श किया गया है। इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना फरमान जारी करने से पहले क्या केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सलाह ली गई है। अब त्योहारों का सीजन आया है। दिवाली, क्रिसमस व आने वाले नए साल के मौके पर बलों के पूर्व अर्धसैनिकों के कैंटीन प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

आईटीबीपी से 3 अक्टूबर को भी एक ऐसा ही आदेश जारी हुआ है। इसमें लिखा है कि विभिन्न बलों के पूर्व अर्धसैनिकों से कहा जाए कि वे अपनी यूनिट या वार्ब के माध्यम से मदिरा जारी करने के लिए आग्रह करें। रणबीर सिंह ने कहा, आईटीबीपी के डीजी को कौन बताए कि कोविड महामारी के चलते पिछले 9 महीने से इस तरह की कोई बैठक नहीं हो सकी है। वैसे भी वेलफेयर के नाम पर बना 'वार्ब' अर्धसैनिक बलों के परिवारों के साथ एक छलावा है। इसके चेयरमैन सीआरपीएफ डीजी हैं। उन्होंने पद संभालने के बाद केंद्रीय स्तर पर पूर्व अर्धसैनिकों के साथ कोई बैठक आयोजित नहीं की है।

इस बाबत आईटीबीपी के एक अधिकारी का कहना है कि बल की कैंटीन में शराब के लेन-देन को अब डिजिटल माध्यम से जोड़ा जा रहा है। मौजूदा सिस्टम को लेकर कई तरह की शिकायतें मिलती थीं। सेवारत कर्मी या पूर्व कर्मी को ज्यादा शराब मिल गई तो किसी को निर्धारित कोटा भी नहीं मिला, इस तरह के अनेक केस देखने को मिले हैं। कुछ मामलों में यह होता है कि एक व्यक्ति ने दो जगहों से शराब ले ली है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल सिस्टम शुरू किया गया है। केंद्रीयकृत सिस्टम चालू होने से गड़बड़ होने की संभावना खत्म हो जाएगी।


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