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केंद्रीय सुरक्षा बलों की मारक क्षमता बढ़ेगी, ऑपरेशनल टीम का हिस्सा बनेंगे ये जांबाज

 

केंद्रीय सुरक्षा बलों की मारक क्षमता बढ़ेगी, ऑपरेशनल टीम का हिस्सा बनेंगे ये जांबाज





सार 


बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और सीआरपीएफ में युवा जांबाजों की टीम तैयार की जा रही है। अब यह देखा जाएगा कि ऑपरेशनल एरिया में बड़ी आयु यानी चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र वाले जवान न हों...

विस्तार


केंद्रीय सुरक्षा बलों की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए एक खास योजना पर काम शुरू हुआ है। सीमा क्षेत्र, आतंकवादियों एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ऑपरेशन के दौरान बलों की युवा टीम को मौका दिया जाएगा। बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी और सीआरपीएफ में युवा जांबाजों की टीम तैयार की जा रही है। अभी तक ऑपरेशनल ड्यूटी में सभी आयु वर्ग के जवान शामिल रहते हैं। अब यह देखा जाएगा कि ऑपरेशनल एरिया में बड़ी आयु यानी चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र वाले जवान न हों। उन्हें पीस पोस्टिंग यानी शांत इलाकों की यूनिटों में भेजा जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बीएसएफ और दूसरे सुरक्षा बल इस योजना पर आगे बढ़ रहे हैं। सीमा पर तैनाती, जहां खतरा ज्यादा रहता है या मुठभेड़ वाले क्षेत्रों में कम आयु वाले जांबाजों को लगाया जाएगा। इससे बल की मारक क्षमता काफी हद तक बढ़ जाएगी। विभिन्न बलों में ड्यूटी के दौरान बीमारियों की वजह से अनेक कर्मी मारे जाते हैं।

हार्ट अटैक, एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। इस साल के शुरू में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब सीआईएसएफ मुख्यालय का दौरा किया था तो उस वक्त यह बात निकलकर सामने आई थी कि दूसरे बलों के ज्यादा आयु वाले कर्मियों को सीआईएसएफ में तैनात कर दिया जाए। साथ ही एसएसबी की ड्यूटी भी अधिकतर समय शांत प्रवृति की मानी जाती है, इसलिए यहां भी दूसरे बलों के चालीस साल से अधिक आयु वाले कर्मियों को तैनात किया जा सकता है।

इसके अलावा सीआईएसएफ में बीस फीसदी स्टाफ की सीधी भर्ती की जाए। बाकी का अस्सी फीसदी स्टाफ दूसरे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से प्रतिनियुक्ति पर ले लिया जाए। बॉर्डर गार्ड फोर्स अब युवा अधिकारियों के दल बना रही है। ये दल पूरे बॉर्डर को मोटरसाईकिलों से कवर करेंगे। उन्हें वहां जो भी कमियां नजर आएंगी, उनकी रिपोर्ट तैयार होगी।

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